अम्लीय (एसिड) और क्षारक (बेस) भोजन के बारे में संपूर्ण जानकारी

1.अम्लीय और क्षारक भोजन के बारे में अहम जानकारी जो हर किसी को पता होनी ही चाहिए-

आम बोलचाल की भाषा में अम्ल वह पदार्थ होता है जो हाइड्रोजन अणु छोड़ने की क्षमता रखता है क्षारक वह पदार्थ होता है जो हाइड्रोजन अणु लेने की क्षमता रखता है।समझने में थोड़ा मुश्किल जरूर है पर आप इसे उदाहरण के तौर पर ऐसे समझ सकते हैं कि नींबू एक अम्लीय पदार्थ है और मीठा सोडा( बेकिंग सोडा) क्षारक पदार्थ है।अम्लीय पदार्थ अक्सर खाने में खट्टे होते हैं।
acidic basic food

यह तो थी आम बात मैं आपको इस लेख में भोजन से जुड़े अम्ल-क्षार बारे में समझाऊंगा।शरीर में पाचन क्रिया के दौरान भोजन के टूटने और अन्य पदार्थों के मिलने से शरीर में लगातार अम्ल बनता रहता है। स्वसन क्रिया के दौरान भी अम्ल का निर्माण होता है। शरीर में अम्ल-क्षार के संतुलन को बनाए रखने कि क्षमता स्वयं शरीर में होती है परंतु गलत खानपान की आदतों से संतुलन बिगड़ जाता है। किडनी यह संतुलन बनाए रखने में हमारी मदद करती है।भोजन ग्रहण करने से पाचन तक भोजन या तो अम्ल बर्ताव करता है या क्षारक।

2. अम्ल-क्षार संतुलन क्यों जरूरी है?

importance of acid base balance
हमारा शरीर हमेशा एक खास पी.एच. पर ही काम करता है।अगर यह पी.एच. संतुलन बिगड़ा तो शरीर के लिए हानिकारक साबित होता है यदि पी.एच. नियंत्रण में ना हो तो निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं-
•श्वसन क्रिया में बाधा।
•मिनरल्स का संतुलन बिगड़ना।
•सेल्स के डिजाइन में बदलाव।
•कोर्टिसोल की उच्च मात्रा।
• शरीर का मंद या धीमा विकास।
जब शरीर में किसी एक की मात्रा अधिक हो जाती है चाहे वह अम्ल हो या क्षार तो इसको संतुलित करने के लिए शरीर को अणुओं की जरूरत पड़ती है।
यह अणु हड्डियों से लेने पड़ते हैं।शरीर संतुलन बनाए रखने के लिए हड्डियों से कैल्शियम और फास्फोरस सोखने लगता है।

acidic food results into joint pain

 बुढ़ापे में हड्डियों का कमजोर होने का प्रमुख वजह अमल क्षार का असंतुलन भी है। कुछ देश जैसे कि अमेरिका फिनलैंड इंग्लैंड जहां पर सभी भरपूर मात्रा में कैल्शियम प्राप्त करते हैं वहां भी हड्डियों की बीमारी आम है।इसके साथ ही साथ शरीर में पथरी होने का भी खतरा बढ़ जाता है क्योंकि शरीर से जरूरी मिनरल्स निकल जाते हैं। मांसपेशियों में पाए जाने वाला ग्लूटेन भी अम्ल-क्षार के संतुलन को बनाए रखने में योगदान देता है। संतुलन बिगड़ने पर ग्लूटेन भी इसी के लिए इस्तेमाल हो जाता है जिससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

3.अम्लीय-क्षारीय भोजन क्या होते हैं?

केवल खाने की सामग्री  का पी.एच. पता लगाकर यह नहीं पता लगाया जा सकता कि वह पेट में जाने के बाद अम्लीय या क्षारक कैसा बर्ताव करेगा। उदाहरण के तौर पर नींबू सिरका वैसे तो अम्लीय होते हैं पर शरीर में जाने पर क्षारक बनाते हैं। भोजन अम्ल-क्षारक कैसा बर्ताव करेगा इसका पता लगता है कि भोजन किस प्रकार शरीर में टूटेगा।ज्यादातर प्रोटीन अमीनो एसिड में टूटते हैं जिससे अमल बनता है।पेड़ों से प्राप्त भोजन क्षारक बनाने वाले होते हैं जो अमल की मात्रा को कम करते हैं।वसायुक्त भोजन 7 पी.एच. की होते हैं यानी कि ना अमल ना क्षारक।

What food is acidic and basic?

अमल बनाने वाले भोजन में डेयरी उत्पाद, मीट मछली,मधुकर,बाजरा,जो,प्रोटीन होती है। इसके अलावा कोकोकोला,मूंगफली,बादाम,मक्की,चावल, गेहूं का आटा, ब्रेड, बटर, चिकन, अंडा, दही भी अम्ल बनाते हैं।

क्षारक बनाने वाले सब्जियां,फल,हरी चाय,शराब, अंगूर,नींबू,संतरा,चाय,सेब,केला,किशमिश,अंगूर, आम,संतरा, अनानास,तरबूज,गाजर,गोभी,मशरूम, आलू,पालक,टमाटर होते हैं।

4.अम्ल क्षार संतुलन बनाए रखने के कारगर उपाय है कि- 

अलग-अलग प्रकार की फल सब्जियों का सेवन करें इसके अलावा अधिक नमक वाले खाने से परहेज रखें।

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