kutta palne ke fayde(Benifits of owning a dog in hindi)


लेखक – दीपक                  पढ़ने का समय-3 मिनट
जब से मेरा जन्म(1998) हुआ है तब से हमारे घर में कोई ना कोई कुत्ता रहा है।2016 में हमारा पेट् शेरू भी मर गया था उसके बाद से हमने कभी कोई कुत्ता नहीं पाला।शहर में कुत्ता पालने से पड़ोसियों को दिक्कत होती थी इसलिए उसके बाद कभी कोई पेट नहीं पाला।
जिंदगी में पेट होने और ना होने पर ज़िन्दगी कैसी होती है मैं इसको अच्छे से समझ सकता हूं।

 

1. अनुशासन-हीनता…शेरू के जाने के बाद से ही अनुशासहीनता ने मुझे घेर लिया है।शेरू के रहते हुए मुझे कभी अलार्म लगाने की जरूरत नहीं पड़ी।अगर सुबह 4 बजे सैर पर ना लेकर जाऊं तो पूरा घर सिर पर उठा लेता था ।रोज-रोज सुबह 4:00 उठने से कभी-कभी चिड भी होती थी ।पर अब उसके जाने के बाद 4 बजे उठने की आदत बिल्कुल ही छूट चुकी है ।सोने उठने के टाइम का कोई नियम ही नहीं रह गया है। अब कभी 6:00 बजे उठता हूं तो कभी 7:00 बजे।

2.थकान-आलस…शेरू के जाने के बाद दूसरा सबसे बड़ा असर मेरी मम्मी पर पड़ा है। मेरी मम्मी भी शेरू को घुमाने मेरे साथ ही जाया करती थी। शेरू हम दोनों को 1 घंटे तक अच्छे से सैर करवाके पसीना निकाल देता था। जब से शेरू गया है तबसे मम्मी की सेहत भी गिरती जा रही है। उनको थकान आलस ने घेर लिया है।मम्मी सुबह की सैर पर अभी भी जाती है पर जितनी सैर शेरू करवाता था ,उतनी कोई नहीं करवा सकता।

3.छोटी-छोटी शारीरिक परेशानियां… शेरू के बाद मेरा तो सैर करना बंद हो ही गया है जिससे सारा दिन कमजोरी- थकान महसूस होती रहती है। बिना कुछ करे थकान का अनुभव होता है।सारा दिन उबासी आना आम बात हो गई है।

4.रात को नींद अच्छे से ना आना… शेरू के जाने के बाद से कभी भी सुकून की नींद नहीं ली। जब तक शेरू था तब तक रात में कोई डर नहीं लगता था।पूरा परिवार दरवाजा खुला छोड़ कर ही सो जाता था।अब तो दो बार दरवाजे का ताला चेक करके सोता हूं! उसके जाने के बाद चोर पानी का मीटर उखाड़ के ले गए थे। नुकसान चाहे बहुत कम हुआ था पर फिर भी मन में यही ख्याल आता है अगर शेर होता तो चोरी होना नामुमकिन था।

5.अच्छे दोस्त की कमी का महसूस होना… अगर आप भी मेरी तरह अंतर्मुखी स्वभाव के हैं जिनके बहुत कम दोस्त बनते हैं तो आपको एक पेट जरूर पालना चाहिए। शेरू ने कभी मुझे दोस्त की कमी का एहसास नहीं होने दिया। जैसे ही उसके पास जाता था वैसे ही पूंछ हिलाने लग जाता था।मेरे पैरों को चाटने लग जाता था। मेरे कंधों पर अपने दोनों पंजे रख देता था।
जितनी मर्जी थकान होती थी उसकी हरकतें देख कर भाग जाती थी। उसके रहते शायद ही कभी तनाव महसूस किया हो पर अब मुश्किल कुछ भी नहीं है पर तनाव ज्यादा रहता है।

शेरू के जाने के बाद कभी-कभी मन में ख्याल आता है मैंने उसे नहीं पाला था बल्कि उसने मुझे पाल रखा था।

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