pachan shakti badhane ke gharelu upay,tarike(in 2020)

आपने अक्सर यह सुना होगा कि सब बीमारियों की शुरुआत पेट से ही होती है और यह तथ्य बहुत हद तक सही है भी! जैसा हम भोजन करते हैं वैसा ही महसूस करते हैं और वैसा व्यवहार भी करने लगते हैं।

healty food makes your mood healthy

नोबेल पुरस्कार विजेता मेतचनिकोफ ने एक बार कहा था- “इंसान की मृत्यु उसके पेट से ही शुरू होती है”। 19वीं शताब्दी में उन्होंने यह पता लगाया था कि बीमारी और जल्दी बुढ़ापे का कारण पेट में पनप रहे खतरनाक बैक्टीरिया होते हैं।

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में, कीटनाशक वाली सब्जियां, केमिकल युक्त भोजन शरीर के अंदर जाता ही रहता है। बहुत से लोग सही जानकारी ना होने के कारण अपने पेट को स्वस्थ नहीं रख पाते हैं।

शरीर को बीमारियों से लड़ने के लिए 75% रोग प्रतिरोधक क्षमता पेट से ही मिलती है। यानी की बीमारियों से लड़ने की क्षमता पेट ही देता है ।अगर पेट ही स्वस्थ नहीं होगा तो हम भी स्वस्थ नहीं होंगे।

हमारे पेट में पाचन का काम केवल हमारा पेट ही नहीं बल्कि पेट में मौजूद 400 से भी अधिक किस्म के बैक्टीरिया भी करते हैं। यदि हम कुछ गलत भोजन करते हैं तो अच्छे बैक्टीरिया पर भी असर पड़ता है और उससे हमारे पाचन क्रिया में।

अच्छी पाचन क्रिया के लिए जरूरी है कि -वह भोजन जिससे हमें एलर्जी हो उससे परेज रखें ।यदि कुछ समय-समय बाद आपको भी पेट में शिकायत रहती है तो अवश्य यह गलत खान-पान की आदतों और दिनचर्या के कारण हो सकता है। नीचे दी गई निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर आप अपने पेट को स्वस्थ रख सकते हैं।

healthy food improves digestion

1. अच्छा भोजन करना-

पेट का काम है भोजन को पचाना।अगर आप भोजन ही अच्छा नहीं करेंगे तो आपका पेट कैसे स्वस्थ रह सकता है।तला हुआ भोजन जिसमें अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट,वसा, तेल होता है उससे पेट में होने वाली समस्याओं का खतरा भी अधिक रहता है तैलीय भोजन में अधिक मात्रा में वसा होने के कारण पेट में चर्बी का जमा हो जाना भी आम बात है

अमेरिका जैसे देश में जंक फूड के प्रभाव के कारण लगभग 50% बच्चे मोटापे का शिकार हैं। विदेशी खानपान से प्रभावित होकर यहां के लोग भी खतरे से अनजान जंक फूड को खाना आधुनिक होने की निशानी समझते हैं पेप्सी,कोक, आइसक्रीम जैसे पदार्थों में अप्राकृतिक ढंग से मीठा मिला दिया जाता है; जिससे पेट में जलन होना आम बात है ।

यह अप्राकृतिक मीठा पेट में खतरनाक बैक्टीरिया को बढ़ाता है।जिसके फलस्वरूप, यह बैक्टीरिया पेट में एसिड और अन्य जहरीले पदार्थ बनाते हैं जिससे; पेट में जलन होने लगती है। अधिक वसा वाला भोजन काफी देर में हजम होता है जिससे अक्सर कब्ज होने की समस्या रहती है।

fibre rich food improves digestion

2.अधिक फाइबर/रेशा लेना-

बहुत से लोगों को यह मालूम नहीं होगा कि रेशा युक्त भोजन यानी कि फाइबर का भोजन खाना पचाने में कितना बड़ा योगदान होता है।

जो आप भोजन करते हैं उसमें काफी मात्रा में तेल होता है जिसकी वजह से पेट में वह भोजन अच्छे से टूट नहीं पाता है क्योंकि पेट उस भोजन पर तैलीय होने की वजह से पकड़ नहीं बना पाता है।इसको आप ऐसे समझ सकते हैं जब आपके हाथ में तेल लगा होता है तो किसी चीज पर आप की पकड़ अच्छे से नहीं बन पाती है।ठीक वैसे ही तैलीय भोजन पर पेट की पकड़ नहीं बन पाती है।

इसको दूर करने के लिए आपको फाइबर यानी कि रेशा युक्त भोजन करना चाहिए ।रेशे युक्त भोजन में- सलाद में खीरा,टमाटर,प्याज,चकुंदर,मूली का सेवन अवश्य करना चाहिए। रेशा भोजन पचाने के लिए पानी भी प्रदान करता है। साथ ही साथ रेशा भोजन को पूरे पाचन तंत्र में अच्छे से पाचन के लिए आगे बढ़ाता रहता है।

Stomach microbiome role in food digestion

3.पेट के अच्छे बैक्टीरिया को स्वस्थ रखना-

जैसा कि आपको पता ही होगा पाचन क्रिया में पेट के बैक्टीरिया का बहुत बड़ा योगदान होता है। यह बैक्टीरिया पेट के बहुत ही अच्छे मित्र होते हैं ।आपको जानकर हैरानी होगी हमारे पेट में- पेट के सेल से ज्यादा बैक्टीरिया के सेल पाए जाते हैं।

अगर यह बैक्टीरिया ही स्वस्थ नहीं होंगे तो आपकी पाचन क्रिया भी दुरुस्त नहीं होगी। अधिक सोडा वाले उत्पाद जैसे कोको कोला, पेप्सी इन को नुकसान पहुंचाते हैं।आपके इन मित्रों को दही, छाछ,लस्सी बेहद पसंद होती है। इसलिए अगर आप इन्हें खुश रखेंगे तो आपका पेट भी मुस्कुराता रहेगा।

drinking adequate amount of water increase digestion

 4.पर्याप्त मात्रा में पानी पीना-

भोजन को पचाने के लिए ऑक्सीजन बेहद आवश्यक है। भोजन को यह ऑक्सीजन हमारे सांस के द्वारा नहीं बल्कि पानी के द्वारा मिलती है। पानी पेट में जाकर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूटता है और यही ऑक्सीजन पाचन क्रिया में मदद करती है।

पानी से ही भोजन पेट से लेकर गुदाद्वार तक का सफर तय करता है ।रोजाना लगभग ढाई से 3 लीटर तक पानी पीना चाहिए।

परंतु पानी को लेकर खास ध्यान देने की बात यह है कि-

•खाना खाने के तुरंत बाद  कभी पानी नहीं पीना चाहिए।खाना खाने के लगभग 1 या 2 घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए नहीं तो आपके शरीर में भोजन को पचाने वाले रस मंद पड़ जाते हैं और पाचन ढंग से नहीं हो पाता है।

•यह भी जरूरी है कि सर्दियों में खाना खाने के बाद ठंडा पानी कभी नहीं पिएं। क्योंकि ठंडे पानी से पाचक रस मंद पड़ जाते हैं। हमेशा गर्म पानी ही पिएं।

5.तनाव मुक्त रहना –

तनाव या चिंता की स्थिति में भोजन वैसे ही अच्छा नहीं लगता है।पेट को भोजन पचाने के सारे निर्देश दिमाग द्वारा ही दिए जाते हैं यदि दिमाग ही तनाव में होगा तो पेट भी ढंग से पाचन क्रिया नहीं कर पाएगा। इसलिए तनाव की स्थिति में भोजन कम ही करना चाहिए।

eating wisely improves digestion

6.भोजन आराम से करना-

कुछ लोग खासकर बच्चे खाना बहुत जल्दबाजी में खाते हैं। हमेशा याद रखें कि भोजन की पाचन क्रिया मुंह से ही शुरू हो जाती है।शर्करा का टूटना मुंह से ही शुरू होता है।

इसलिए भोजन को-

•अच्छे से चबा चबाकर खाएं

•हमेशा धीरे-धीरे खाना खाएं

• टीवी देखते हुए भोजन जरूरत से अधिक खाया जाता है इसलिए खाना खाते हुए टीवी बंद कर दें।

yoga increases digestion7.योग करना- 

योग करना पाचन क्रिया को स्वस्थ रखने के साथ साथ रक्त शुद्धिकरण में भी सहायक है। इसके लिए आप त्रिकोणासन अपना सकते हैं जो पेट की मांसपेशियों को लचीला बनाने के साथ-साथ वजन घटाने में भी सहायक है।

इसके अलावा वज्रासन, पवनमुक्तासन, उष्ट्रासन,धनुरासन, नौकासन, सेतुबंधआसन भी कर सकते हैं। इसके अलाव रोज सुबह सेर करना साइकिल चलाना भी लाभदायक है।

8. बुरी आदतों का त्याग –

 शराब पीना,धूम्रपान करना,नशीले पदार्थों का सेवन करना सब पेट का हाजमा खराब करने के कारण हैं।इसलिए ऐसी आदतों से जल्द से जल्द छुटकारा पाना ही सही है।

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