विटामिन डी – कमी मैं क्या खाएं , रोग , इलाज़, घरेलू उपचार ,कैलसिट्रायल युक्त भोजन

सबसे पहले आम बोल चाल की भाषा सही करने के लिए आपको बता दें कि विटामिन -D असल में विटामिन है ही नहीं। विटामिन वह पदार्थ होता है जिसको शरीर खुद नहीं बना पाता है बल्कि भोजन से प्राप्त करना पड़ता है। विटामिन-D का असली नाम कैलसिट्रायल है, जोकि हार्मोन है।यह शरीर में भोजन से मैग्नेशियम, फास्फेट और कैल्शियम सोखने में मदद करता है।इस पोस्ट में मैं आपको विटामिन डी – कमी मैं क्या खाएं , रोग , इलाज़, घरेलू उपचार बताऊंगा।

1. कैलसिट्रायल से जुड़ी अन्य जरूरी बातें-

• बहुत से लोगों को यह भी भ्रम रहता है कि धूप में विटामिन-D विद्यमान होता है परन्तु यह भी कोरा झूठ है।धूप की किरण जब त्वचा पर पड़ती है तब शरीर में मौजूद एर्गोस्टीरोल (ergosterol) नामक पदार्थ विटामिन-डी में बदल जाता है।

Important knowledge about Vitamin D विटामिन डी - कमी मैं क्या खाएं , रोग , इलाज़, घरेलू उपचार ,कैलसिट्रायल युक्त भोजन

•  कैलसिट्रायल पांच प्रकार का होता है – D1,D2,D3,D4,D5

•बहुत से लोग कपड़ा कपड़े पहनकर धूप में बैठ जाते हैं ऐसा करने से केवल गर्मी मिलती है। शरीर में विटामिन-डी तभी बनता है जब शरीर के अंगों पर धूप पड़ती है।

•खिड़की के कांच से आती हुई धूप से भी शरीर में विटामिन डी नहीं बनता है।

•काले लोगों में मेलेनिन नाम का केमिकल पाया जाता है जो विटामिन डी के बनने को शरीर में कम कर देता है इसलिए उनको अधिक देर तक धूप सीखनी पड़ती है।

•धूप से बचाने वाली क्रीम लगाकर धूप सेकने से भी विटामिन डी नहीं बनता है।

2.कैलसिट्रायल/ विटामिन डी की शरीर में आवश्यकता-

Vitamin D boosts immunity

 

 

•कैलसिट्रायल की मदद से ही शरीर में भोजन से कैल्शियम सोखना संभव हो पाता है अगर शरीर में  कैलसिट्रायल ही नहीं होगा तो आप से जितना मर्जी कैल्शियम खाले शरीर द्वारा कैल्शियम बाहर निकाल दिया जाएगा।

•कैलसिट्रायल हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को नियंत्रण में रखता है।यह शरीर को रोग से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज बनाने का निर्देश देता है।

•रक्त में कैल्शियम-फास्फोरस की मात्रा का नियंत्रण भीकैलसिट्रायल रखता है।

•हड्डियों के कमजोर हो जाने पर भीकैलसिट्रायल  की गोलियों का उपयोग किया जाता है

3.कैलसिट्रायल की कमी से होने वाले रोग –

Rickets is common disease due to lack of vitamin D

• दुनिया में लगभग 70% लोग कैलसिट्रायल की कमी का शिकार हैं।इसका कारण अपर्याप्त मात्रा में धूप लेना और ऐसा भोजन करना जिसमेंकैलसिट्रायल की मात्रा कम हो। इसकी कमी के कारण बच्चों में रिकेट्स नाम की बीमारी हो जाती है जिसमें हड्डियां कमजोर हो जाती है और टूटने का खतरा अधिक बढ़ जाता। नवजात शिशु में हड्डियों का कमजोर होना माओं से संबंधित है।यह बीमारी अफ्रीका और भारत में आम है इसलिए बहुत जरूरी है कि गर्भावस्था और शिशु के स्तनपान के समय मां को भरपूर मात्रा में कैलसिट्रायल मिले ताकि बच्चा भी स्वस्थ रहें।

Lack of vitamin D result into osteoporosis

वही वयस्कों की बात की जाए तो वयस्कों में जिनकी उम्र 40 से अधिक हो चुकी है उनमें हड्डियां अपना कैल्शियम खोने लगती हैं।बहुत से लोग भरपूर कैल्शियम तो लेते हैं परंतु फिर भी उनकी हड्डियां कमजोर होती जाती है क्योंकि कैल्शियम को सोखने के लिए कैलसिट्रायल नहीं लेते हैं।उसके साथ ही साथ हड्डियों का मुलायम हो जाना,रीड की हड्डी का झुक जाना, पैरों का टेढ़ा हो जाना, मांसपेशियां कमजोर हो जाना भी कैलसिट्रायल की कमी के लक्षण है। बुढ़ापे में हड्डियों के कैल्शियम खत्म होने का एक कारण अम्ल-क्षार का संतुलन बिगड़ना भी है। शरीर में अमल या क्षार अधिक होने पर शरीर से कैल्शियम खत्म होने लगता है।

4. कैलसिट्रायल युक्त भोजन –

Food rich in Vitamin D

•सेमन(salmon) मछली मांसाहारी लोगों के लिए कैलसिट्रायल का बहुत अच्छा स्त्रोत है। 100 ग्राम सेमन में 16.7μg होता है।

शाकाहारी लोगों के लिए मशरूम कैलसिट्रायल का सबसे बेहतर विकल्प है।100 ग्राम मशरूम में 31.9μg ग्राम होता है।बहुत से लोग मशरूम को मांसाहारी मानते हैं कुछ लोग इसे शाकाहारी मानते हैं। पर असल में यह ना कोई पेड़-पौधा है और ना ही किसी किस्म का जानवर। मशरूम एक प्रकार की फफूंदी होती है। मशरूम में भी इंसानों की तरह धूप सोखकर  कैलसिट्रायल बनाने की क्षमता होती है। मशरूम को बनाने से पहले 20 मिनट धूप में रख देने से कैलसिट्रायल की मात्रा बढ़ जाती है।

•अंडे में 2.2μg होता है।

•100 ग्राम दूध में 1.3μg कैलसिट्रायल ही पाया जाता और।दही लस्सी में भी लगभग इतना ही होता है। पनीर में 2.5μg होता है।

•अनाज और दालें इसका अच्छा स्त्रोत है। 100 ग्राम अनाज में 8.3μg होता है। इसके अलावा बादाम चावल भी इसका अच्छा स्त्रोत है।

5.दवाई द्वारा कैलसिट्रायल की पूर्ति घरेलू उपचार –

Supplement of Vitamin D

रिकेट्स जैसी बीमारियों में दवाइयों का इस्तेमाल करना ही पड़ता है। विटामिन डी-3 की गोलियों के सेवन से बूढ़े लोगों में हड्डियों की बीमारी से होने वाली मृत्यु में कमी पाई गई है।कैलसिट्रायल की कमी जल्दी बूढ़े होने का कारण बनती है।कैलसिट्रायल की   दवाइयों का इस्तेमाल हड्डी में फ्रैक्चर के खतरे को भी कम करता है।

6. शरीर में विटामिन डी की निर्धारित मात्रा(एक दिन में)

Required amount of vitamin D
•1 साल के बच्चे में 10μg
•1 से 70 साल की उम्र में 15μg
•71वर्ष से अधिक उम्र में                                                    20μg

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